Bhramar Ka Jharokha

जब हम सुधरेंगे तो जग सुधरेगा -आइये प्रेम की ज्योति जलाते चलें -प्रेम से सब कुछ जीता जा सकता है शनैः शनैः -...जोश होश रख मन बुलंद कर चलते चलें शांति स्थापना की ओर -जय हिंद जय भारत -भ्रमर ५

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अजगर बन मै यहीं रेंग लूं काहे स्विटज़र जाना

Posted On: 20 Oct, 2011 Others में

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मात लक्ष्मी कृपा करो तुम
घर आँगन भर जाए
बादल बरसें सोने चांदी
वही पियें हम खाएं
प्रेम से अब क्या लेना देना
प्रेम तो हुआ खिलौना
जब चाहो तुम जोड़ो तोड़ो
ना आदम ना हौव्वा
रीति नीति सब भई पुरानी
आँखों का सूखा है पानी
मानव मन बिकता है अब तो
घास डाल कुछ चारा पानी
आँगन में बाजार लगा है
मोल भाव ही करते दिखते
मात पिताश्री तो गायब हैं
ममी डेड सी तरते रहते
अधनंगों नंगों की दुनिया
ताज पहन कर घूमें
कोई तलवे चाट रहा है
कोई बांह भरे है चूमे
हीरा पन्ना मोती माणिक
कहाँ जौहरी जो पहचाने
क्या चन्दन है कहाँ रंगोली
क्या उपवन क्या पुष्प खिला
अब तो कैक्टस चुभ जाए रे
सेज पे पहली रात मिला
हे लक्ष्मी तू धनी बना दे
घर में गाड़ खजाना
अजगर बन मै यहीं रेंग लूं
काहे स्विटज़र जाना
हर दीवाली दिया जलाया
नहीं ख़ुशी ना पूड़ी पाया
अब तो तेल नहीं है बाकी
इस दीवाली दिया ना बाती ?
उनके घर क्या पाए माता
क्या तुझको है वहां सुहाता
झर झर झरते कर से तेरे
रत्न वहीं पर क्यों भर जाता ?
रोशन कर दें मन तू मेरा
ईर्ष्या मन में ना रह पाए
जगमग जगमग ज्योति जला दे
लक्ष्मी दौड़ी यहीं आ जाए
गणपति बप्पा भी संग आयें
सरस्वती जिह्वा बस जाएँ
मधुर मधुर अहसास भरा हो
प्रेम का पग पग दिया जला हो
अनुपम दिव्य लोक हो जाए
मन रोशन माँ संग हो जाए
दीवाली सुन्दर हो जाए !!
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(फोटो साभार गूगल/नेट से )

हमारे सभी मित्र मण्डली को दीवाली की अग्रिम रूप से हार्दिक शुभ कामनाएं ..क्या जाने कल कहाँ रेंग जाऊं ….जय गणपति लक्ष्मी मैया ..छवियों के लिए नया अवतार लेना होगा जे जे की कृपा से स्पेस नहीं बढ़ा …..
शुक्ल भ्रमर ५
२०.१०.२०११ ९.०० मध्याह्न
जल पी बी



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14 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Rajkamal Sharma के द्वारा
October 22, 2011

:) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o प्रिय भ्रमर जी …..सादर प्रणाम ! आपकी यह रचना बहुत ही बेहतरीन बन पड़ी है ….. स्विटजरलैंड के बैंको में एक सपोलिया भी नहीं रेंग सकता है अजगर की तो आप बात ही जाने दीजिए इसलिए आपसे गुजारिश ही की इधर ही घूमी -२ (रेंगी -रेंगी ) कर लीजिए मेरे अजगर महाराज ….. हमको भी पता चलता रहेगा की भ्रमर है जहाँ -२ माया है वहां -२ सरस्वती और लक्ष्मी माता जी को तस्वीरों में (विद गजानन ) तो देखते ही है आपके घर पर भी इस बार दर्शन करने का सोभाग्य पाकर खुद को धन्य कर ले मेरी शुभकामनाये और मुबारकबाद दीपावली की सपरिवार बधाईयां और मुबारकबाद :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o

    shuklabhramar55 के द्वारा
    November 2, 2011

    प्रिय गुरुदेव हार्दिक अभिवादन उम्मीद है रोशन हो गया होगा तन मन घर बाहर दिवाली पर … आप की चुटीली प्रतिक्रिया ने मन मोहा …आप की शुभ कामनाएं लगीं दिवाली घर गाँव में मनाई ..सच में अजगर का स्विट्जर में पहुंचना नामुमकिन ही है उड़ने वाले ही वहां पर मार ….भारत भर अपने देश से ही निपट नहीं … भ्रमर है जहाँ -२ माया है वहां -२ अरे ये क्या ? भ्रमर का माया से कहाँ ?? भ्रमर का तो पराग– खूबसूरती– खुश्बू –खुमार..खूब वाह वाही ..बस ..दिल का दिल से ….शांति और सुकून से बस … आभार आपका शुक्ल भ्रमर५

syeds के द्वारा
October 22, 2011

प्रिय भरमार जी, आपको नया ब्लॉग,पुराने ब्लॉग का स्पेस बढाया जाना और सबसे बड़ी बात बेहतरीन पोस्ट ..बहुत बहुत मुबारक हो… आपको और आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं http://syeds.jagranjunction.com

    shuklabhramar55 के द्वारा
    November 2, 2011

    प्रिय सैयद जी , बस आप सब की दुवाएं रहीं तो ऐसे ही रंग लायेंगी ..अपना स्नेह बनाये रखें रचना आप के मन को भायी …सुन ख़ुशी हुयी ..आप सब को भी ढेर सारी हार्दिक बधाई

UMASHANKAR RAHI के द्वारा
October 21, 2011

आदरणीय नमस्कार मानवीय सम्वेदनाओं पर इससे अच्छा कटाक्ष क्या हो सकता है इस भाव पूर्ण रचना के लिए कोटिश:बधाई दीपावली की हार्दिक शुभ कामनाये

    shuklabhramar55 के द्वारा
    November 2, 2011

    प्रिय उमाशंकर राही जी हार्दिक अभिवादन और अभिनन्दन …रचना भाव पूर्ण कुछ कटाक्ष से युक्त हो आप के दिल को छू सकी सुन हर्ष हुआ ..बहुत बहुत आभार प्रोत्साहन हेतु अपना स्नेह बनाये रखें शुक्ल भ्रमर ५

naturecure के द्वारा
October 21, 2011

आदरणीय शुक्ल जी, सादर प्रणाम ! देखो सरस्वती माँ जी की कृपा आप पर हो गयी | आपका नया ब्लॉग भी एक्टिवेट हो गया और पुराने ब्लॉग पर भी स्पेश बढ़ा दिया गया ……..बहुत-बहुत बधाई ! और हाँ सुन्दर रचना एवं दीवाली की (अग्रिम) हार्दिक शुभ कामनाएं…साधुवाद |

    shuklabhramar55 के द्वारा
    November 2, 2011

    सच कहा आप ने कैलाश भाई जी ..माँ की कृपा से बेडा पार हो ही जाता है ..जागरण परिवार की कृपा भी माँ से कहाँ कम है ..अपना सब का स्नेह बनाये रखें .सब शुभ होगा ही … दीवाली पर नेट से दूर पड़ा रहा ..बहुत खला आप सब से दूर रहना ..मन मार कर…. आशा है सब मंगलमय बीता ..प्रोत्साहन के लिए आभार शुक्ल भ्रमर ५

JJ Blog के द्वारा
October 21, 2011

आदरणीय शुक्ल भ्रमर जी, आपके पुराने ब्लॉग का स्पेस कोटा बढ़ा दिया गया है. आप अपने पुराने ब्लॉग के द्वारा भी निर्विंघ्न ब्लॉगिंग को अंजाम दे सकते हैं. धन्यवाद जागरण जंक्शन परिवार

    shuklabhramar55 के द्वारा
    November 2, 2011

    बहुत ही प्रसन्नता हुयी जे जे जी आप से ये सुन की स्पेस बढ़ा दिया गया है मन सच अभिभूत हुआ ..जे जे परिवार सदा अपने इस परिवार के साथ फलता फूलता रहे ..जोश होश जागते हमारे भाई बंधू निर्विघ्न ऐसे ही ब्लागिंग को अंजाम दे पायें इस का ख्याल रखें .. आप के साथ हमारे सभी प्रिय लेखक गन को मंगल कामनाएं … आभार शुक्ल भ्रमर ५

    shuklabhramar55 के द्वारा
    November 2, 2011

    बहुत ही प्रसन्नता हुयी जे जे जी आप से ये सुन की स्पेस बढ़ा दिया गया है मन सच अभिभूत हुआ ..जे जे परिवार सदा अपने इस परिवार के साथ फलता फूलता रहे ..जोश होश जगाते हमारे भाई बंधु निर्विघ्न ऐसे ही ब्लागिंग को अंजाम दे पायें इस का ख्याल रखें .. आप के साथ हमारे सभी प्रिय लेखक गन को मंगल कामनाएं … आभार शुक्ल भ्रमर ५

    shuklabhramar55 के द्वारा
    November 2, 2011

    बहुत ही प्रसन्नता हुयी जे जे जी आप से ये सुन की स्पेस बढ़ा दिया गया है मन सच अभिभूत हुआ ..जे जे परिवार सदा अपने इस परिवार के साथ फलता फूलता रहे ..जोश होश जगाते हमारे भाई बंधु निर्विघ्न ऐसे ही ब्लागिंग को अंजाम दे पायें इस का ख्याल रखें .. आप के साथ हमारे सभी प्रिय लेखक गण को मंगल कामनाएं … आभार शुक्ल भ्रमर ५

Santosh Kumar के द्वारा
October 20, 2011

आदरणीय भ्रमर जी .,.सादर प्रणाम नए अवतार की हार्दिक बधाई ,…अलग मूड में लिखी बिलकुल सत्य रचना .. बादल बरसें सोने चांदी वही पियें हम खाएं प्रेम से अब क्या लेना देना प्रेम तो हुआ खिलौना”……………… अंत बहुत ही सार्थक कामना के साथ किया है ,..आपकी कामना में हम भी अपनी आवाज लगते हैं ,…दीपावली की आपको भी अग्रिम शुभकामनाये ,. आप जालंधर पहुँच गए क्या ?..कभी लुधियाने की तरफ भी घूम जाइए ,.वैसे यहाँ घूमने के लिए शायद कुछ नहीं …हार्दिक आभार

    shuklabhramar55 के द्वारा
    October 21, 2011

    प्रिय संतोष जी पहुच तो गए हैं लेकिन भटकने वाले के लिए कहाँ एक ठिकाना आज फिर जालंधर से उ.प्र . जाना हम तो लुधियाना बहुत बार गए आये लेकिन तब आप …आज तो बस छुक छुक गाडी से उधर से बस … बहुत बहुत आभार आप का बधाई नए अवतार और शुभ कामनाओं के लिए ..दीवाली आप सब के जीवन को आलोकित कर दे मन रोशन हो घर परिवार सब मंगल कामनाओं वालों से भरे ..लक्ष्मी की कृपा बनी रहे … दूसरा ब्लॉग जब तक चलेगा कोशिश उसी में छवियों के लिए ये बस ..मूड खिन्न हो जाता है दुनिया को समझाते समझाते है न ? आभार पुनः भ्रमर ५


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